मुश्किल है होना रू-कश रुख़्सार की झलक के — मीर तक़ी मीर

मुश्किल है होना रू-कश रुख़्सार की झलक के हम तो बशर हैं उस जा पर जुलते हैं मलक के

“It is difficult to glimpse the cheek of a beloved, for we are mere mortals who are captivated by the divine.”

— मीर तक़ी मीर

अर्थ

किसी प्रिय की सुंदर झलक देखना कठिन है, क्योंकि हम तो साधारण मनुष्य हैं जो किसी दिव्य सत्ता के आकर्षण में जलते हैं।

विस्तार

यह शेर इंसान की नश्वरता और महबूब की जादुई खूबसूरती का तड़पा बयान करता है। शायर कहते हैं कि महबूब के चेहरे की बस एक झलक देखना भी कितना मुश्किल है। क्यों? क्योंकि हम तो बस बशर हैं, और महबूब की मौजूदगी मात्र से ही हम जलते जा रहे हैं। यह एहसास दिल को छू जाता है!

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