मत मिल अहल-ए-दुवल के लड़कों से — मीर तक़ी मीर

मत मिल अहल-ए-दुवल के लड़कों से 'मीर'-जी उन से मिल फ़क़ीर हुए

“From the sons of the courtly people, do not meet, 'Mir'-ji, for from them, the fakir was separated.”

— मीर तक़ी मीर

अर्थ

मत मिल अहल-ए-दुवल के लड़कों से, मीर-जी उन से मिल फ़क़ीर हुए। इसका अर्थ है कि शायर को दरबारी लोगों के बेटों से नहीं मिलना चाहिए, क्योंकि उनसे मिलकर फ़क़ीर अलग हो गया था।

विस्तार

यह शेर एक गहरा आगाह है.... कि हमें दुनिया की चमक-दमक से दूर रहना चाहिए। 'अहल-ए-दुवल' यानी वो लोग जो महफ़िल-ए-शाही, यानी दुनियावी नशा में डूबे रहते हैं। शायर कहते हैं कि उनसे मिलना मत.... क्योंकि उनकी संगत आपको इतना बदल देगी कि आप खुद से बिछड़ जाएंगे। यह एक तरह की आध्यात्मिक चेतावनी है, कि दुनियावी रिश्ते अक्सर हमें फ़क़ीरी की हालत तक पहुंचा देते हैं।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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