जीते जी आह तिरे कूचे से कोई न फिरा — मीर तक़ी मीर
“Even while living, I never found anyone to wander from your ways, Only those who endured cruelty left after death.”
अर्थ
जीते जी आह तिरे कूचे से कोई न फिरा, जो सितम-दीदा रहा जा के सो मर कर निकला। (अर्थात्, जीवन में कभी भी किसी ने आपके रास्ते से भटकना नहीं सीखा, केवल वे लोग जो अत्याचार सहकर गए, वे ही मृत्यु के बाद निकले।)
विस्तार
यह शेर एक बहुत गहरा दर्द बयान करता है। शायर कह रहे हैं कि जब मैं ज़िंदा था, तब कोई भी आपके रास्ते से दूर नहीं गया। जो लोग इतना सितम सहकर भी वहाँ से जा पाए, वो भी तो मरकर निकले! इसका मतलब है कि आपके प्रभाव से कोई ज़िंदा होकर दूर नहीं जा सकता। यह इश्क़ की नश्वरता और उसकी गहराई दोनों को दिखाता है।
Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.
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