दाग़ हूँ रश्क-ए-मोहब्बत से कि इतना बेताब — मीर तक़ी मीर
दाग़ हूँ रश्क-ए-मोहब्बत से कि इतना बेताब
किस की तस्कीं के लिए घर से तू बाहर निकला
“I am so restless, from the jealousy of love, For whose portrait did you leave the house?”
— मीर तक़ी मीर
अर्थ
मैं प्यार की ईर्ष्या से इतना बेचैन हूँ, कि तू किस की तस्वीर देखने के लिए घर से बाहर निकला।
विस्तार
यह शेर मोहब्बत के उस बेताब आलम को बयान करता है, जहाँ ईर्ष्या (jealousy) एक बीमारी बन जाती है। शायर कहते हैं कि वे रश्क-ए-मोहब्बत से इतने बेताब हैं कि उन्हें नींद नहीं आती। और फिर वो अपने महबूब से पूछते हैं कि आखिर किस की तस्कीन के लिए तुमने घर छोड़ा? यह सिर्फ़ सवाल नहीं, बल्कि एक टूटे हुए दिल का दर्द है जो जवाब मांग रहा है।
Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.
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