बाँधे न फिरे ख़ून पर अपनी तो कमर को — मीर तक़ी मीर
बाँधे न फिरे ख़ून पर अपनी तो कमर को
ये जान-ए-सुबुक तन पे तिरे बार न होवे
“If you do not bind yourself by your own blood, then your waist will not be broken on my body.”
— मीर तक़ी मीर
अर्थ
अगर तुमने अपने खून से खुद को नहीं बांधा, तो तुम्हारी कमर मेरे शरीर पर नहीं टूटेगी।
विस्तार
यह शेर मुहब्बत की उस गहराई को बयां करता है, जहाँ वफ़ा और इhtiyaat (सावधानी) एक साथ टकराते हैं। शायर कहते हैं कि अगर मेरी ज़िन्दगी, मेरा वजूद, तुम्हारी कमर से बंधा नहीं है... तो तुम्हारा यह नज़ुक, खूबसूरत जिस्म मेरे लिए नहीं होना चाहिए, ज़रा भी नहीं! यह एक तरह का ज़बरदस्त दावा है कि इश्क़ में या तो सब कुछ हो या कुछ नहीं।
Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.
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