नहीं सूझता कुछ जो उस बिन हमें
बग़ैर उस के रहते हैं हम कोर से
“I cannot fathom what we are without you, How we survive, merely by your grace.”
— मीर तक़ी मीर
अर्थ
उस के बिना हमें कुछ समझ नहीं आता, हम तो बस उसके सहारे जी रहे हैं।
विस्तार
यह शेर महबूब की महत्ता और आशिक़ की तन्हाई को बयान करता है। शायर कह रहे हैं कि हमारी ज़िंदगी, हमारा वजूद, किसी और वजह से नहीं है। हम तो उस एक शख़्स के इर्द-गिर्द घूमते हैं, जिनकी यादों के बिना हमें कुछ भी समझ नहीं आता। यह सिर्फ मोहब्बत नहीं, यह जीने का एक पूरा तरीक़ा है.... जहाँ महबूब ही हमारी हर पहचान है।
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