इशक़-ओ-मय-ख़्वारी निभे है कोई दरवेशी के बीच — मीर तक़ी मीर

इशक़-ओ-मय-ख़्वारी निभे है कोई दरवेशी के बीच इस तरह के ख़र्ज-ए-ला-हासिल को दौलत चाहिए

“There is no way to survive this intoxication of love and wine among the dervishes; wealth is needed for such unattainable expenditures.”

— मीर तक़ी मीर

अर्थ

इश्क़ और मय-ख़्वारी (प्रेम और शराब के मद में जीना) दरवेशी के बीच कैसे कायम रह सकता है? इस तरह के बिना हासिल खर्चों को पूरा करने के लिए दौलत की ज़रूरत है।

विस्तार

ये शेर मिर्ज़ा तक़ी मीर ने इश्क़ की उस हकीकत को बयान किया है, जहाँ रूहानी जुनून भी एक ख़र्च बन जाता है। शायर कहते हैं कि कोई दरवेश अपनी शराबख़्वारी और इश्क़ को महफ़ूज़ रखता है... लेकिन इस तरह के 'ला-हासिल' (जो कभी मिल न सके) ख़र्च को करने के लिए दौलत चाहिए! ये शेर एक गहरे विरोधाभास को दर्शाता है—कि प्रेम का सबसे ऊँचा स्तर भी दुनिया की नज़रों में किसी कीमत से कम नहीं है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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