आज-कल बे-क़रार हैं हम भी — मीर तक़ी मीर
आज-कल बे-क़रार हैं हम भी
बैठ जा चलने हार हैं हम भी
“Nowadays, we too are restless, We too are weary of walking.”
— मीर तक़ी मीर
अर्थ
आज-कल हम भी बेचैन हैं, और चलना भी अब एक बोझ लगता है।
विस्तार
यह शेर एक बहुत ही गहरे और आधुनिक अहसास को बयान करता है। शायर कह रहे हैं कि बेचैनी सिर्फ़ भाग-दौड़ में नहीं है, बल्कि यह हमारे अंदरूनी हाल में है। यह उस थकावट की बात है, उस बेचैनी की, जो हमें हर जगह, हर वक़्त महसूस होती है। यह दिल की उस हालत को बयां करता है, जहाँ सुकून मिलना नामुमकिन हो जाता है।
Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.
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