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दीवानगी कहाँ कि गरेबाँ से तंग हूँ
गर्दन मिरी है तौक़ में गोया कि फँस रही

What kind of madness is this, that I am weary of your efforts, My neck feels like it is caught in a snare.

मीर तक़ी मीर
अर्थ

यह पागलपन कहाँ का है कि मैं तुम्हारे प्रयासों से तंग हूँ। मेरी गर्दन मानो किसी जाल में फँस गई है।

विस्तार

यह शेर एक बहुत ही गहरा अहसास बयां करता है—कि फँसना बाहर की दुनिया की तंग गलियों से नहीं है। शायर कहते हैं कि मैं तो अपनी ही दीवानगी में, अपनी ही हालत से तंग हूँ। और यह तंग होना इतना कि अब मेरी गर्दन एक फंदे में फँसती हुई महसूस हो रही है। यह सिर्फ़ इश्क़ का दर्द नहीं है, यह ज़िन्दगी की एक गहरी उलझन है।

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