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मैं पा-शिकस्ता जा सका क़ाफ़िले तलक आती अगरचे देर सदा-ए-जरस रही

I could not reach the caravan's foot, even if the sound of the bell continued forever.

मीर तक़ी मीर
अर्थ

मैं क़ाफ़िले के पाँव तक नहीं जा सका, भले ही घंटी की आवाज़ हमेशा आती रही।

विस्तार

यह शेर उस बेचैनी और गहरे लगाव को बयां करता है, जब दिल किसी चीज़ से इतना जुड़ जाता है कि उसे छोड़ना नामुमकिन हो जाता है। शायर कह रहे हैं कि वो उस काफिले के अंत तक नहीं जा पाए, भले ही घंटी की आवाज़ देर से आ रही हो। यह बस यादों का ऐसा जाल है, जो आपको आगे बढ़ने नहीं देता। यह लगाव, यह ठहराव... कितना दर्दनाक और कितना खूबसूरत होता है!

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