ज़ब्ह कर मैं कहा था मरता हूँ — मीर तक़ी मीर
ज़ब्ह कर मैं कहा था मरता हूँ
दम नहीं मुझ शिकार में देखा
“I had said I would die in battle's fray, But I saw no death in the hunt's display.”
— मीर तक़ी मीर
अर्थ
ज़ब्ह कर मैं कहा था मरता हूँ, पर शिकार में कोई मौत नहीं दिखी।
विस्तार
यह शेर उम्मीद और हकीकत के बीच का फ़र्क़ बताता है। शायर कहते हैं कि मैंने तो मौत के लिए तैयार था... जैसे ज़ब्ह किया जाए। लेकिन जब उसने शिकार किया, तो मेरे अंदर जान ही नहीं बची थी। यह बताता है कि किसी सच्चे एहसास का दर्द, किसी भी शारीरिक तकलीफ से कहीं ज़्यादा गहरा होता है।
Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.
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