Sukhan AI
रहा मैं दर-ए-पस-ए-दीवार-ए-बाग़ मुद्दत लेक
गई गुलों के न कानों तलक फ़ुग़ाँ मेरी

I remained at the threshold of the garden wall for a long time, But my voice reached only to the ears of the flowers.

मीर तक़ी मीर
अर्थ

मैं बहुत समय तक बाग की दीवार के पास खड़ा रहा, लेकिन मेरी आवाज़ फूलों के कानों तक ही गई।

विस्तार

यह शेर एक बहुत ही ख़ूबसूरत तसव्वुर पेश करता है। शायर कहते हैं कि वह एक बाग़ की दीवार के पीछे, बहुत देर तक रुका रहा। अपने प्यार और तड़प में वह इतना खोया हुआ था कि उसके होंठों से निकली हर फुसफुसाहट... हर बात सिर्फ़ फूलों तक पहुँच रही थी। यह इल्ज़ाम है कि इश्क़ की गहराई इंसान को कितना अकेला और कितना जुड़ा हुआ महसूस कराती है।

ऑडियो

पाठ
हिंदी अर्थIn app
अंग्रेज़ी अर्थIn app
हिंदी विस्तारIn app
अंग्रेज़ी विस्तारIn app
Comments

Read-only on web. Join the conversation in the Sukhan AI mobile app.

0

No comments yet.

रहा मैं दर-ए-पस-ए-दीवार-ए-बाग़ मुद्दत लेक | Sukhan AI