हुआ हूँ गिर्या-ए-ख़ूनीं का जब से दामन-गीर
न आस्तीन हुई पाक दोस्ताँ मेरी
“Since I encountered the curtain of blood, my friends' sleeves have not remained pure.”
— मीर तक़ी मीर
अर्थ
जब से मैं खूनी पर्दे के आवरण में आया हूँ, मेरे दोस्तों की आस्तीनें स्वच्छ नहीं रही हैं।
विस्तार
यह शेर गहरे ग़म और तन्हाई के बोझ को बयान करता है। मिर्ज़ा तक़ी मीर कहते हैं कि जब से मैं किसी बड़े दुःख या 'खून के पर्दे' का मालिक बन गया हूँ, मेरे दोस्तों की सादगी, मेरी उदासी ने उन्हें भी छू लिया है। यह ग़म का वह असर है जो सिर्फ़ व्यक्ति पर नहीं, बल्कि उसके आस-पास के रिश्तों पर भी पड़ता है।
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