नहीं है ताब-ओ-तवाँ की जुदाई का अंदोह
कि ना-तवानी बहुत है मिज़ाज-दाँ मेरी
“I do not possess the grief of separation from the state of being drunk, for my disposition is already very intoxicated.”
— मीर तक़ी मीर
अर्थ
मुझे नशीली अवस्था की जुदाई का कोई दुःख नहीं है, क्योंकि मेरा स्वभाव पहले से ही बहुत मदहोश है।
विस्तार
यह शेर एक बहुत ही गहरी मनोदशा को बयां करता है। शायर कह रहे हैं कि उन्हें महबूब की याद से जो जुदाई का दर्द होता है, वह उन्हें परेशान नहीं करता.... क्योंकि उनका अपना मिज़ाज ही इतना ना-स्थिर है, इतनी बेचैनी में जी रहा है। यह बताता है कि उनका आंतरिक उथल-पुथल इतना बड़ा है कि किसी बाहरी नुकसान का दर्द उसे फीका पड़ जाता है।
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