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इज़तिराब-ओ-क़िल्क़-ओ-ज़ोफ़ में किस तौर जियूँ जान वाहिद है मिरी और हैं आज़ार कई

In the distress of agitation, worry, and grief, how shall I live? My life is but one, but my troubles are many.

मीर तक़ी मीर
अर्थ

अस्थिरता, चिंता और दुख की स्थिति में मैं कैसे जीऊँ? मेरा जीवन तो एक है, लेकिन मेरे कष्ट बहुत हैं।

विस्तार

यह शेर उस दर्द को बयान करता है जब इंसान एक साथ बहुत सारी तकलीफें झेल रहा होता है। शायर पूछ रहे हैं कि इस बेचैनी, इस घबराहट और इस उदासी में जीना कैसे मुमकिन है? जीवन तो एक ही है, लेकिन जो ज़ख्म दिल पर लगे हैं, वो गिन नहीं सकते। यह वियोग और पीड़ा का आलम है।

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