ख़ौफ़-ए-तन्हाई नहीं कर तू जहाँ से तो सफ़र — मीर तक़ी मीर

ख़ौफ़-ए-तन्हाई नहीं कर तू जहाँ से तो सफ़र हर जगह राह-ए-अदम में मिलेंगे यार कई

“Do not fear the solitude from where you journey, For in every place, many companions await.”

— मीर तक़ी मीर

अर्थ

तन्हाई से डरना नहीं, जहाँ से भी यात्रा करो, हर जगह 'राह-ए-अदम' में कई दोस्त मिलेंगे।

विस्तार

यह शेर हमें ज़िंदगी के सफर का एक बहुत गहरा अहसास कराता है। शायर कहते हैं कि तन्हाई से डरना नहीं चाहिए, क्योंकि जीवन की राह... हर जगह, हर मोड़ पर, हमें दोस्त और साथी मिलते ही रहते हैं। यह शेर हमें सिखाता है कि इंसान अकेला नहीं है, उसका सहारा हमेशा कहीं न कहीं मौजूद होता है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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