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वे ही चालाकियाँ हाथों की हैं जो अव्वल थीं अब गरेबाँ में मिरे रह गए हैं तार कई

Only the hands were clever with their tricks before, Now many strings remain in the cage of the throat.

मीर तक़ी मीर
अर्थ

पहले हाथों की चालाकी ही कमाल थी, अब गले में कई तार बची हैं।

विस्तार

यह शेर ज़िंदगी के उस मोड़ को बयान करता है, जब हमारे पास जो हुनर और आज़ादी होती थी, वो कहीं सिमट जाती है। शायर कहते हैं कि जो चालाकी कभी हाथों में आज़ाद थी, वो अब एक पिंजरे में रह गई है। यह पिंजरा हमारे अनुभवों की सीमाएं है, वो एहसास हैं जो अब पहले की तरह खुलकर जी नहीं सकते। यह एक दर्दनाक एहसास है, जो वक़्त के गुज़रने से होता है।

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