इस वक़्त से क्या है मुझे तो चराग़-ए-वक़्फ़ मख़्लूक़ जब जहाँ में नसीम-ओ-सबा न थी

“From this time, what does it matter to me, for the lamp of time (or fate) was not lit when the world had no gentle breeze or spring air.”

— मीर तक़ी मीर
अर्थ

इस समय से मुझे क्या, क्योंकि जब इस दुनिया में कोई हवा या बहार नहीं थी, तब न ही समय का दीपक जला था।

विस्तार

यह शेर शायर के अस्तित्व की शाश्वतता को दर्शाता है। मिर्ज़ा तक़ी मीर कहते हैं कि किसी भी वक़्त या हालात से उन्हें कोई फ़र्क नहीं पड़ता। उनका इशारा है कि उनका होना समय से पहले का है। जैसे दुनिया में नसीम-ओ-सबा (हवा और बहार) नहीं थी, तब कोई मख़्लूक़ (सृष्टि) नहीं थी—तो यह वक़्त उनके लिए मायने नहीं रखता।

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