फूल कुछ लेते न निकले थे दिल-ए-सद-पारा — मीर तक़ी मीर
“The heart, which could not leave without taking some flowers, Has learned the art of breaking my pieces of the heart.”
अर्थ
फूल कुछ लेते न निकले थे दिल-ए-सद-पारा। तर्ज़ सीखी है मिरे टुकड़े जिगर करने की। (अर्थ: मेरा दिल, जो बिना फूल लिए निकल नहीं सकता था, अब मेरे दिल के टुकड़े-टुकड़े करने की कला सीख चुका है।)
विस्तार
यह शेर सिर्फ़ प्यार की बात नहीं करता, बल्कि दिल टूटने की एक अजीब आदत की बात करता है। शायर कह रहे हैं कि मेरा दिल कभी इतना खुशियों से भरा था कि वो कभी खाली नहीं हो सकता था। लेकिन अब... अब तो मैंने खुद को तड़पाना सीख लिया है! ये किस कदर की पीड़ा है, जहाँ दर्द भी एक कला बन जाता है। Mir Taqi Mir ने इस दर्द को बहुत ही खूबसूरती से पिरोया है।
Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.
ऑडियो
Free — just your email. You'll come right back here.
No comments yet. Be the first.
