अब के बरसात ही के ज़िम्मे था आलम का वबाल — मीर तक़ी मीर

अब के बरसात ही के ज़िम्मे था आलम का वबाल मैं तो खाई थी क़सम चश्म के तर करने की

“The calamity of the world was due to this rainy season, But I had taken an oath to quench the thirst of the eyes.”

— मीर तक़ी मीर

अर्थ

अब के बरसात ही के ज़िम्मे था आलम का वबाल, यानी इस बरसात का ही ज़िम्मेदार था दुनिया का संकट। पर मैंने तो आँखों की प्यास बुझाने की कसम खाई थी।

विस्तार

यह शेर दुनिया के बड़े उथल-पुथल और अपने व्यक्तिगत वादों के बीच के गहरे टकराव को दर्शाता है। मिर्ज़ा तक़ी मीर कहते हैं कि दुनिया का सारा हंगामा तो बस मौसम की वजह से है। लेकिन उनके लिए, असली बोझ वो कसम है जो उन्होंने खाई थी—वो वादा कि उनकी आँखें सिर्फ़ मुहब्बत के आँसुओं से नम रहेंगी। यह दिखाता है कि प्रकृति के चक्र तो सामान्य हैं, पर दिल का ये वादा कहीं ज़्यादा भारी होता है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

ऑडियो

पाठ
हिंदी अर्थ
अंग्रेज़ी अर्थ
हिंदी विस्तार
अंग्रेज़ी विस्तार
Comments · 0

Free — just your email. You'll come right back here.

No comments yet. Be the first.