न थे तुझ से नाज़ुक मयानान-ए-गुलशन — मीर तक़ी मीर

न थे तुझ से नाज़ुक मयानान-ए-गुलशन बहुत तो कमर जैसे मू थी कसू की

“Neither was it from you, the delicate fragrance of the garden, Nor was it like the waist, which was curved like a cypress.”

— मीर तक़ी मीर

अर्थ

न यह तुझ से है नाज़ुक महक बाग़ की, न यह कमर जैसी कसू की।

विस्तार

देखिए, शायर जी यहां कह रहे हैं कि पूरे गुलशन की नज़ाकत, वो प्यारे रास्ते, वो फूल—इनसे तो हमें कोई फ़र्क नहीं पड़ता। असली आकर्षण तो कहीं और है! वो बात है महबूबा की कमर की... जो कसू के पंख जैसी, एकदम निखार से भरी हुई थी। यह शेर बताता है कि जब कोई चीज़ इतनी ख़ूबसूरत हो, तो आस-पास का सब कुछ धुंधला पड़ जाता है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

ऑडियो

पाठ
हिंदी अर्थ
अंग्रेज़ी अर्थ
हिंदी विस्तार
अंग्रेज़ी विस्तार
Comments · 0

Free — just your email. You'll come right back here.

No comments yet. Be the first.