दम-ए-मर्ग दुश्वार दी जान इन ने — मीर तक़ी मीर
“The life-breath of death was difficult for this soul, But 'Mir' desired the cup of the grave.”
अर्थ
दम-ए-मर्ग दुश्वार दी जान इन ने, मगर 'मीर' को आरज़ू थी कसू की। इसका अर्थ है कि इस आत्मा के लिए मृत्यु का श्वास कठिन था, लेकिन 'मीर' की इच्छा कब्र का प्याला थी।
विस्तार
यह शेर दर्द और ख्वाहिश के बीच की उलझन को बयां करता है। शायर कहते हैं कि महबूब ने जीवन को इतना मुश्किल बना दिया है कि जीना भी सज़ा बन गया है। लेकिन इस तमाम तकलीफ के बावजूद, शायर की आरज़ू बहुत मामूली है—बस एक प्याला। यह बताता है कि जब दर्द सहने लायक नहीं होता, तो बस एक पल का सुकून ही सबसे बड़ी चाहत बन जाती है।
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