क्या क्या न रीझें तुम ने पचाईं — मीर तक़ी मीर

क्या क्या न रीझें तुम ने पचाईं अच्छा रिझाया ऐ मेहरबाँ आह

“What all charms have you, beloved, so effortlessly consumed, Oh, how you have charmed, dear, my heart's lament.”

— मीर तक़ी मीर

अर्थ

क्या-क्या न रीझें तुम ने पचाईं, अच्छा रिझाया ऐ मेहरबाँ आह। इसका शाब्दिक अर्थ है कि प्रिय ने अपने कई आकर्षणों से मन को कैसे मोह लिया और कैसे मन की पीड़ा को आनंद में बदल दिया।

विस्तार

यह शेर इश्क़ के उस मीठे दर्द को बयान करता है, जब महबूब ने कई तरह से दिल को बहलाया हो। शायर कह रहे हैं कि महबूब ने कितनी ही अदाओं से मुझे रिझाया है... और अंत में बस एक आह के साथ कह देते हैं कि 'अच्छा ही किया ऐ मेहरबाँ!' यह समर्पण है, एक ऐसी ख़ुशी जो तारीफ़ और मजबूरी दोनों में लिपटी है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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