मुजरिम हुए हम दिल दे के वर्ना — मीर तक़ी मीर
मुजरिम हुए हम दिल दे के वर्ना
किस को कसो से होती नहीं चाह
“Having given our hearts, we have become criminals; else, whom could we ever refuse?”
— मीर तक़ी मीर
अर्थ
दिल देके हम अपराधी हो गए, वर्ना हम किससे मना करते?
विस्तार
यह शेर मोहब्बत की उस मजबूरी को बयां करता है, जो इंसान को किसी के आगे बेबस कर देती है। शायर कहते हैं कि दिल दे देना अपने आप में एक गुनाह है, एक अपराध.... लेकिन जब बात दिल की चाहत की आती है, तो इसे रोकना नामुमकिन है। यह उस एहसास का इज़हार है जब हम अपनी इच्छाओं के आगे हार मान लेते हैं।
Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.
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