हज़रत से उस की जाना कहाँ है — मीर तक़ी मीर

हज़रत से उस की जाना कहाँ है अब मर रहेगा याँ बंदा दरगाह

“From the saint, where do you know of his existence? Will this servant remain confined to the shrine?”

— मीर तक़ी मीर

अर्थ

हज़रत की उपस्थिति का ज्ञान कहाँ से होता है? क्या यह बंदा दरगाह में ही रहेगा।

विस्तार

यह शेर एक सच्चे और गहरे इश्क़ का इज़हार है। शायर पूछ रहे हैं कि कोई व्यक्ति महबूब या हज़रत की जगह कैसे छोड़ सकता है? उनका कहना है कि अब तो बंदा दरगाह में ही मर जाएगा। यह समर्पण की पराकाष्ठा है, जहां रूह और जगह एक हो जाती है। यह बताता है कि जब प्रेम इतना गहरा हो जाए, तो दुनिया की कोई राह या मंज़िल मायने नहीं रखती।

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