उस पर कि था वो शह-ए-रग से अक़रब — मीर तक़ी मीर

उस पर कि था वो शह-ए-रग से अक़रब हरगिज़ न पहुँचा ये दस्त-ए-कोताह

“He was a lion of the vein, and this short hand Never reached him, never touched him.”

— मीर तक़ी मीर

अर्थ

उस पर कि था वो शह-ए-रग से अक़रब, हरगिज़ न पहुँचा ये दस्त-ए-कोताह। इसका अर्थ है कि वह व्यक्ति शिराओं के शेर जैसा था, और यह छोटा हाथ कभी भी उसे छू नहीं पाया।

विस्तार

यह शेर उस बेबसी को बयां करता है, जब इंसान किसी बेहद ख़तरनाक और ज़बरदस्त चीज़ के सामने खड़ा होता है। शायर पूछ रहे हैं कि मेरा ये छोटा सा हाथ.... उस ज़हर जैसे 'शह-ए-रग' से अक़रब को कभी कैसे छू पाएगा? यहाँ 'शह-ए-रग' किसी जानलेवा जुनून या गहरे दर्द का प्रतीक है, जो हमारी समझ से बाहर है। यह अपनी कमज़ोरी को स्वीकार करना है, मगर एक बहुत ही गहरी भावना के साथ!

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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