दिल पे ख़ूँ है यहाँ तुझ को गुमाँ है शीशा — मीर तक़ी मीर

दिल पे ख़ूँ है यहाँ तुझ को गुमाँ है शीशा शैख़ क्यूँ मस्त हुआ है तू कहाँ है शीशा

“The blood on the heart is here, and you are deluded by the mirror; why has the Shaikh grown intoxicated? Where is the mirror?”

— मीर तक़ी मीर

अर्थ

दिल पर खून है यहाँ, और तुझे शीशे से भ्रम है; शायर क्यों मदहोश हुआ है? शीशा कहाँ है?

विस्तार

यह शेर मिर्ज़ा तक़ी मीर की गहरे दर्द और धोखे के एहसास को बयां करता है। शायर कह रहे हैं कि हमारा दिल भले ही बाहर से शीशे जैसा साफ़ दिखे, पर अंदर खून से सना है। वो सवाल करते हैं कि यह मदहोशी क्यों है और वह सच्चाई कहाँ है? यह एक बहुत ही मार्मिक एहसास है कि इंसान कितना भी विश्वास कर ले, पर ज़ख़्म तो अंदर ही कहीं होता है।

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