उठ खड़े हो जो झुके गर्दन-ए-मीना-ए-शराब — मीर तक़ी मीर
“If you rise up, O one whose neck is bowed by wine, complete the service of the wine-cup's bounty.”
अर्थ
उठ खड़े हो जो झुके गर्दन-ए-मीना-ए-शराब, जिसका सिर शराब के मटके से झुका है, वह शराब के बर्तन की सेवा को ही पूरा करे।
विस्तार
ये शेर महबूब की ज़िद और आशिक़ के इकरार का बेहतरीन संगम है। शायर कह रहे हैं कि अगर तुमने शराब की मिना (कलश) को झुकाकर भी सेवा करने का मन बना लिया, तो बस उस सेवा को आख़िर तक निभा देना। ये सिर्फ़ शराब की बात नहीं है.... ये तो इश्क़ की बात है। एक बार जब आप किसी जुनून को गले लगा लेते हैं, तो उसे पूरा करना ही पड़ता है!
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