फ़र्श मस्ताँ करो सज्जादा-ए-बे-तह के तईं — मीर तक़ी मीर

फ़र्श मस्ताँ करो सज्जादा-ए-बे-तह के तईं मय की ताज़ीम करो शीशे का इकराम करो

“Adorn the rug, the cushion of the boundless floor, Honor the wine, and the mirror's gentle glory pour.”

— मीर तक़ी मीर

अर्थ

फर्श मस्ताँ करो, सज्जादा-ए-बे-तह के तईं। मय की ताज़ीम करो, शीशे का इकराम करो। इसका शाब्दिक अर्थ है: फर्श को सजाओ, इस अंतहीन कालीन (सज्जादा) की तैयारी करो। शराब का सम्मान करो, और शीशे की शोभा बढ़ाओ।

विस्तार

यह शेर महफ़िल में एक तरह का जश्न मनाने का न्योता है। मिर्ज़ा तक़ी मीर कह रहे हैं कि आइए, हम इस रात को पूरी तरह से सजा दें! न केवल ज़मीन को, बल्कि उस नशा को भी, जो रूह से जुड़ा है। शायर कहते हैं कि मय को भी इत्मीनान से सजाना है, जैसे कोई बेशकीमती तोहफ़ा हो। यह इश्क़ और मदिरा के रंग में रंग जाने की बात है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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