शैख़ जी आओ मुसल्ला गिरो जाम करो — मीर तक़ी मीर

शैख़ जी आओ मुसल्ला गिरो जाम करो जिंस तक़्वा के तईं सिर्फ़ मय-ए-ख़ाम करो

“O Sheikh, come and pour the cup at the musalla; pour only the wine of the raw spirit (or the unrefined) from the cup of Taqwa.”

— मीर तक़ी मीर

अर्थ

शेख़ जी, आओ और मुसल्ला पर जाम डालो; तक़वा के प्याले से सिर्फ़ कच्ची शराब डालो।

विस्तार

यह शेर एक गहरी विद्रोह की भावना को बयां करता है। शायर यहाँ किसी आध्यात्मिक गुरु से कह रहे हैं कि वे दिखावे की सादगी को छोड़कर, जीवन के नशीले और कच्चे आनंद को गले लगा लें। यह सिर्फ़ शराब का जाम नहीं है.... बल्कि यह जीवन के उस जुनून को स्वीकार करने की बात है, जिसे रूढ़ियाँ हमेशा दबा देती हैं।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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