दिल ले के लौंडे दिल्ली के कब का पचा गए — मीर तक़ी मीर
दिल ले के लौंडे दिल्ली के कब का पचा गए
अब उन से खाई पी हुई शय क्या वसूल हो
“The boys of Delhi, how long have they absorbed my heart? Now, what pleasure can be derived from the things I've consumed from them?”
— मीर तक़ी मीर
अर्थ
दिल्ली के लड़कों ने मेरा दिल कब का पचा लिया है। अब उनसे जो कुछ भी खाया-पिया है, उसका क्या मज़ा आएगा।
विस्तार
यह शेर एक गहरी निराशा और तल्लीनता को बयां करता है। मिर्ज़ा तक़ी मीर कहते हैं कि दिल्ली के नौजवानों ने दिल तो ले ही लिया.... तो अब उनसे किसी भी अनुभव से क्या हासिल होगा? यह उन क्षणिक सुखों और भावनात्मक थकावट पर एक बहुत ही कड़वा, मगर सच्चा तंज़ है।
Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.
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