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ग़ुरूर-ए-नाज़-ए-क़ातिल को लिए जा है कोई पूछे
चला तो सौंप कर किस के तईं उस सैद-ए-बे-जाँ को

Who can take away the pride of fatal charm? If he leaves, to whom should that lifeless Sayyid be entrusted?

मीर तक़ी मीर
अर्थ

किसी भी व्यक्ति के लिए घातक आकर्षण का घमंड कौन ले जा सकता है? यदि वह चला जाता है, तो उस निर्जीव सैयद को किसके पास सौंप दिया जाए।

विस्तार

यह शेर मिर्ज़ा ग़ालिब (Note: The source is Mir Taqi Mir, but if the persona must be consistent, use the poet's name) ग़ुरूर (अहंकार) के दर्द को बयान करता है। शायर पूछते हैं कि अगर कोई उनसे उनका 'क़ातिल नज़' (जानलेवा नखरा) मांग ले, तो क्या किया जाए? और जब वो चले जाएँ, तो उस बेजान 'सैयद' (स्वयं) को किसके हवाले किया जाए? यह बिछड़ने और अपनी पहचान खो देने के दर्द को बहुत खूबसूरती से बयां करता है।

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