फ़लक ने गर किया रुख़्सत मुझे सैर-ए-बयाबाँ को
निकाला सर से मेरे जाए मू ख़ार-ए-मुग़ीलाँ को
“If the sky were to leave me for the journey of the wilderness, It would pluck out my head for the tresses of the stray goat.”
— मीर तक़ी मीर
अर्थ
अगर आसमान ने मुझे रेगिस्तान की सैर के लिए छोड़ दिया, तो वह मेरे सिर से भटकते बकरी के बालों को निकाल लेगा।
विस्तार
यह शेर बिछड़ने के दर्द को बयां करता है। मिर्ज़ा तक़ी मीर कह रहे हैं कि अगर तकदीर ने मुझे जंगल जैसे सफ़र पर छोड़ दिया... तो भी मैं सह सकता हूँ। लेकिन दूसरी लाइन में जो बात है, वह दिल को छू जाती है। 'ख़ार-ए-मुग़ीलाँ' का निकल जाना, यानी सिर का ताज, सम्मान या आत्म-गर्व का खो जाना। शायर कहते हैं कि ये नुकसान सबसे बड़ा है।
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