कहे है कोहकन कर फ़िक्र मेरी ख़स्ता-हाली में
इलाही शुक्र करता हूँ तिरी दरगाह 'आली में
“They speak of my worries in this dilapidated state, Yet in your shrine, O Almighty, I give thanks to God.”
— मीर तक़ी मीर
अर्थ
लोग मेरी खराब हालत पर फ़िक्र करते हैं, लेकिन मैं तेरी दरगाह में अल्लाह का शुक्रिया अदा करता हूँ।
विस्तार
यह शेर इंसान की फिक्र और रब की मेहरबानी के बीच का फ़र्क़ बताता है। शायर कहते हैं कि लोग तो मेरी ख़स्ता-हाली पर फ़िक्र करते हैं, लेकिन उनका शुक्रिया अदा करना मेरे लिए काफ़ी नहीं है। मेरा असली शुकराना... सिर्फ़ उस 'आली' दरगाह में है, जहाँ सिर्फ़ इल्हाम और रूहानी सुकून मिलता है।
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