यूँ सआ'दत एक जमधर मुझ को भी गुज़ारिए — मीर तक़ी मीर

यूँ सआ'दत एक जमधर मुझ को भी गुज़ारिए मुंसिफ़ी कीजे तो मैं तो महज़ बे-तक़सीर हूँ

“Oh Sa'adat, please pass me through this crowd, If you are just, I am merely faultless.”

— मीर तक़ी मीर

अर्थ

ऐ सआदत, कृपया मुझे भी एक जमधर (कटार) से गुज़ार दीजिए। यदि आप न्याय करेंगी, तो मैं तो बिल्कुल निर्दोष हूँ।

विस्तार

यह शेर दया और न्याय की एक भावुक गुहार है। शायर यहाँ 'सआदत' को संबोधित करते हुए, एक पल की कृपा मांग रहे हैं। वह अपनी बेगुनाही साबित करते हुए कहते हैं कि अगर आप वाकई इंसाफ करना चाहते हैं, तो आप देखेंगे कि वह महज़ निर्दोष हैं। यह हर इंसान की उस इच्छा को दर्शाता है, जब उसे किसी कठिन परिस्थिति में निष्पक्ष न्याय की ज़रूरत होती है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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