जो मिरे हिस्से में आवे तेग़-ए-जमधर सैल-ओ-कार्द — मीर तक़ी मीर

जो मिरे हिस्से में आवे तेग़-ए-जमधर सैल-ओ-कार्द ये फ़ुज़ूली है कि मैं ही कुश्ता-ए-शमशीर हूँ

“If the venom of Jamdar mountain and cardamon comes into my share, It is naught but folly that I am the sword-wound.”

— मीर तक़ी मीर

अर्थ

जो मिरे हिस्से में आवे तेग़-ए-जमधर सैल-ओ-कार्द, ये फ़ुज़ूली है कि मैं ही कुश्ता-ए-शमशीर हूँ। इसका अर्थ है कि यदि मेरे हिस्से में जमधर पर्वत और इलायची का ज़हर आ जाए, तो यह मूर्खता है कि मैं स्वयं तलवार का घाव हूँ।

विस्तार

देखिए, यह शेर सिर्फ़ तलवार की बात नहीं करता.... यह एक इंसान की आत्म-शक्ति की बात करता है। शायर कहते हैं कि अगर जमधर जैसी महान तलवार भी मेरे हिस्से में आ जाए, तो भी वो बेकार है। क्योंकि मैं ख़ुद ही वो जंग हूँ, वो संघर्ष हूँ, जिसे कोई भी तलवार जीत नहीं सकती। यह पंक्तियाँ बताती हैं कि असली ताकत हमारे अंदर होती है, किसी बाहरी हथियार में नहीं।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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