जों कमाँ गरचे ख़मीदा हूँ पे छूटा और वहीं — मीर तक़ी मीर
“If I am a praise-giver who has left his dwelling, and now I am an arrow moving toward his lane, my friends.”
अर्थ
अगर मैं एक प्रशंसा करने वाला हूँ जिसने अपना घर छोड़ दिया है, और अब मैं अपने दोस्तों के लिए उसी के मोहल्ले की ओर चलता तीर हूँ।
विस्तार
इस शेर में शायर ने कमान और तीर का बहुत गहरा बिंब (imagery) इस्तेमाल किया है। शायर कहते हैं कि मेरा दिल एक ऐसे तीर जैसा है, जिसे कमान से छोड़ दिया गया है। चाहे कमान की तान कम क्यों न हो जाए, मेरा तीर फिर भी एक ही दिशा में जाएगा—वो है महबूब का कूचा। यह इश्क़ की उस मज़बूती को बयां करता है, जो किसी भी हालात में नहीं बदलती। यह वफ़ादारी का इक़रार है।
Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.
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