ने फ़लक पर राह मुझ को ने ज़मीं पर रौ मुझे — मीर तक़ी मीर

ने फ़लक पर राह मुझ को ने ज़मीं पर रौ मुझे ऐसे किस महरूम का में शोर-ए-बे-तासीर हूँ

“O, the path upon the sky, and the path upon the earth, for me,”

— मीर तक़ी मीर

अर्थ

नेफ़लक पर राह मुझ को ने ज़मीं पर रौ मुझे। ऐसे किस महरूम का मैं शोर-ए-बे-तासीर हूँ। (अर्थ: मेरे लिए आकाश पर रास्ता और ज़मीन पर रौशनी है। मैं किस ऐसे महरूम का बे-असर शोर हूँ।)

विस्तार

यह शेर जीवन के विरोधाभास और आत्म-मूल्य की बात करता है। शायर कहते हैं कि उन्हें आसमान में और ज़मीन पर दोनों जगह राह दिखाई गई है, यानी जीवन में बहुत से अवसर और मार्गदर्शन मिला है। फिर भी, वह खुद को केवल 'बे-तासीर शोर' कहते हैं। यह उस गहरे दर्द को बयान करता है जब इंसान को लगता है कि वह बेकार है, भले ही उसके आस-पास कितनी भी चीज़ें और रास्ते क्यों न हों।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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