बे-सुतूँ भी है वही और वही जू-ए-शीर — मीर तक़ी मीर

बे-सुतूँ भी है वही और वही जू-ए-शीर था नमक शोहरत-ए-शीरीं का सो फ़रहाद नहीं

“He is the same in his unadorned state, and the same with the milk-white lion; but for Farhad, he was not the salt of the sweetness of fame.”

— मीर तक़ी मीर

अर्थ

वह (व्यक्ति) अपनी सादी अवस्था में भी वैसा ही है, और वैसा ही दूधिया शेर के साथ; परंतु शोहरत की मिठास का नमक (स्वाद) फ़रहाद के लिए नहीं था।

विस्तार

इस शेर में मिर्ज़ा ने ज़िंदगी की सच्चाई बयान की है। शायर कहते हैं कि चीज़ें अपनी जगह पर वैसी ही रहती हैं, चाहे वो कोई मज़बूत खंभा हो या शेर की शान से भरी ज़ुल्फ़ें। और दूसरी लाइन में वो शोहरत की मिठास को भी नकारते हैं। उनका कहना है कि जो असली नशा होता है, वो सिर्फ़ झूठी शोहरत से नहीं आ सकता, वो तो कुछ और ही होता है।

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