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हिज्राँ की कोफ़्त खींचे बे-दम से हो चले हैं सर मार मार या'नी अब हम भी सो चले हैं

The sorrow of separation has dragged us, lifeless and spent, We strike the head, Ya'ni, now we, too, have fallen asleep.

मीर तक़ी मीर
अर्थ

हिज्र के कफ़न खींचते बेजान से हो चले हैं, सर मार मार या'नी अब हम भी सो चले हैं।

विस्तार

यह शेर विरह की शिद्दत और उससे होने वाली थकावट को बयां करता है। शायर कहते हैं कि बिछड़न ने उन्हें बेजान कर दिया है, और अब वो इतने थके हुए हैं कि 'मार मार' करने के लिए भी नहीं हैं। यह 'मार मार' यहाँ दर्द की गुहार नहीं है, बल्कि एक तरह का समर्पण है—कि अब मैं इतनी गहराई में सो चुका हूँ कि मुझे किसी दर्द का अहसास तक नहीं हो रहा।

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