रखती है मुझे ख़्वाहिश-ए-दिल बस-कि परेशाँ — मीर तक़ी मीर
रखती है मुझे ख़्वाहिश-ए-दिल बस-कि परेशाँ
दरपय न हो इस वक़्त ख़ुदा जाने कहाँ हूँ
“My heart only desires that you remain undisturbed, for God knows where I am in this moment.”
— मीर तक़ी मीर
अर्थ
मेरे दिल की ख्वाहिश बस यही है कि तुम परेशान न हो, क्योंकि इस वक़्त मैं कहाँ हूँ, यह तो ख़ुदा ही जानता है।
विस्तार
यह शेर दरअसल इंसान की भावनात्मक उलझन को बयां करता है। शायर कहते हैं कि दिल को तो परेशाानी चाहिए, एक तरह की बेचैनी चाहिए। लेकिन असली डर तो कहीं और है—कि इस वक़्त, इस पल में, हम खुद कहाँ हैं, हमें क्या पता! यह एहसास है किसी गहरे इश्क़ के साथ-साथ अपने वजूद के अनिश्चित होने का।
Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.
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