पंजा है मिरा पंजा-ए-ख़ुर्शीद मैं हर सुब्ह — मीर तक़ी मीर
पंजा है मिरा पंजा-ए-ख़ुर्शीद मैं हर सुब्ह
मैं शाना-सिफ़त साया-ए-रू ज़ुल्फ़-ए-बुताँ हूँ
“My paw is the paw of the sun in every morning, I am the splendid shadow of your face, O hair of the forest.”
— मीर तक़ी मीर
अर्थ
मेरा पंजा हर सुबह सूरज के पंजे जैसा है, और मैं जंगल के बाल जैसा तुम्हारे चेहरे का शानदार साया हूँ।
विस्तार
इस शेर में मिर्ज़ा तक़ी मीर ने अपनी तारीफ़ की है, लेकिन ये तारीफ़ किसी साधारण बात की नहीं है। वो कह रहे हैं कि उनका वजूद हर सुबह सूरज की तरह चमकता है... और उनकी सुंदरता इतनी मोहक है कि वो जंगल की लटों (ज़ुल्फ़) और चेहरे की परछाई की तरह लगती है। ये एक ज़बरदस्त आत्म-प्रस्तुति है!
Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.
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