जल्वा है मुझी से लब-ए-दरिय-ए-सुख़न पर — मीर तक़ी मीर
“There is a splendor in me, upon the lips of the ocean of poetry, My wave is of a hundred colors, for I am the ever-flowing current.”
अर्थ
मुझमें एक ऐसा तेज है कि वह काव्य-सागर के होंठों पर झलक रहा है। मेरी लहर सौ रंगों की है, क्योंकि मैं निरंतर बहती हुई धारा हूँ।
विस्तार
यह शेर सिर्फ़ शायरी नहीं है, यह एक ऐलान है! शायर मिर्ज़ा तक़ी मीर अपनी कला की गहराई बता रहे हैं। वह कहते हैं कि मेरी ज़ुबान, मेरा वजूद, एक नदी की तरह है.... और इस नदी में कितने रंग हैं, कितने नज़ारे हैं! यह बात करना कि मैं ही उस बहती धारा का स्रोत हूँ, यह अपने हुनर पर एक बेमिसाल दावा है।
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ऑडियो
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