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क्या कहिए आह-ए-इश्क़ में ख़ूबी नसीब की
दिलदार अपना था सो दिल-आज़ार हो गया

What can I say about the beauty of this love's sigh, that even the beloved's own heart became a source of anguish?

मीर तक़ी मीर
अर्थ

क्या कहूँ कि इस इश्क़ की आह में कैसी ख़ूबी है, कि अपने दिलदार का अपना ही दिल-आज़ार बन गया।

विस्तार

यह शेर इश्क़ की गहराई पर एक सवाल उठाता है। शायर पूछते हैं कि इश्क़ की साँसों में ऐसी कौन सी ख़ूबी है जो हमें नसीब हो? और फिर कहते हैं कि जो दिलदार कभी अपना था, वो ही आज दिल-आज़ार हो गया। यह उस विरोधाभास को दिखाता है कि कैसे मोहब्बत में जो हमें पूरा करता है, वही हमें सबसे ज़्यादा दर्द देता है।

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