क्या जानिए कि क्या है ऐ 'मीर' वज्ह ज़िद की
सौ बार हम तो उस को महजूब कर चुके हैं
“Oh Meera, what do you know of this stubborn will? We have already made him ashamed a hundred times.”
— मीर तक़ी मीर
अर्थ
ऐ मीर, तुम ज़िद की वजह क्या जानती हो? हमने उसे सौ बार शर्मिंदा किया है।
विस्तार
यह शेर उस अश्क की कहानी है, जो बार-बार टूटने के बाद भी, एक ही धागे में बंधा रहता है। शायर कहते हैं कि महबूब की ज़िद का कारण कोई नहीं जानता... यह ज़िद समझ से परे है। और वक्ता खुद को इतना थका हुआ बता रहा है कि उसने उस प्यार को सौ बार भुलाने की कोशिश की है। मगर दिल का ये रिश्ता, ये बंधन... ये बार-बार हमें तोड़कर फिर से जोड़ देता है।
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