हंगामा-ए-क़यामत ताज़ा नहीं जो होगा
हम इस तरह के कितने आशोब कर चुके हैं
“The clamor of the apocalypse, if it comes, will not be new, We have endured so many such upheavals.”
— मीर तक़ी मीर
अर्थ
प्रलय का कोलाहल, अगर आएगा तो नया नहीं होगा, हम इस तरह के कितने उथल-पुथल से गुज़र चुके हैं।
विस्तार
यह शेर हमें इंसान के सब्र और सहनशक्ति के बारे में बताता है। शायर कहते हैं कि क़यामत का हंगामा कोई नई बात नहीं है। हमने ज़िंदगी में ऐसे कितने तूफ़ान देखे हैं, कितने बड़े बदलावों से गुज़रे हैं। यह एक गहरा एहसास है कि जीवन में उथल-पुथल आना स्वाभाविक है, और हम हर बार इससे निकलने की ताकत रखते हैं।
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