ख़िरद-मंदी हुई ज़ंजीर वर्ना — मीर तक़ी मीर
“The chain became dull, lest the madness passing Was once beautiful in its spree.”
अर्थ
ख़िरद-मंदी हुई ज़ंजीर वर्ना, गुज़रती ख़ूब थी दीवाना-पन में। इसका अर्थ है कि यह जंजीर फीकी पड़ गई, वरना जो दीवानापन गुज़र रहा था, वह बहुत खूबसूरत था।
विस्तार
यह शेर उस मदहोशी की बात करता है जब इश्क़ इंसान को अपनी समझदारी से दूर ले जाता है। शायर कहते हैं कि अगर ज़ंजीर-ए-ख़िरद (समझदारी की जंजीर) नहीं टूटी होती, तो ये गुज़रते पल इतने खूबसूरत नहीं होते। यह एहसास है कि कभी-कभी, बेख़ुदी और जुनून में ही ज़िंदगी का सबसे गहरा और सबसे हसीन नशा होता है।
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