कहाँ के शम-ओ-परवाने गए मर — मीर तक़ी मीर
कहाँ के शम-ओ-परवाने गए मर
बहुत आतश-बजाँ थे इस चमन में
“Where have the lamps and moths of the evening gone, There were so many flames in this garden.”
— मीर तक़ी मीर
अर्थ
शम-ओ-परवाने कहाँ गए मर, इस चमन में बहुत आतश-बजाँ थे। (अर्थात, इस बाग में बहुत रोशनी और रौनक थी, तो शाम के दीये और पतंगे कहाँ गए?)
विस्तार
यह शेर एक बहुत गहरा तसव्वुर है। शायर यहाँ शम-ओ-परवाने का इस्तेमाल करते हैं, जो कि आशिक़ के जुनून या किसी गहरे जुनून का प्रतीक है। वो पूछते हैं कि वो परवाने कहाँ गए, जो इस चमन की आग से इतने मोहित थे। यह बिछड़ने का दर्द है... और उस जुनून की याद है जो एक दिन बुझ जाता है।
Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.
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