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अपने कूचे में फ़ुग़ाँ जिस की सुनो हो हर रात
वो जिगर-ए-सोख़्ता ओ सीना-जला मैं ही हूँ

In the alleyway of the lover, whose sorrow you hear every night, I am that burning heart, that blazing chest.

मीर तक़ी मीर
अर्थ

जिस के अपने मोहल्ले में फ़ुग़ाँ (विरह का दुख) की हर रात सुनवाई हो, वह टूटा हुआ जिगर और जलता हुआ सीना मैं ही हूँ।

विस्तार

यह शेर प्रेम की गहरी समझ को बयां करता है। शायर, मीर तक़ी मीर, अपने महबूब से कह रहे हैं कि जिस तड़प या आह की आवाज़ उन्हें हर रात अपने ही रास्ते से सुनाई देती है... वह दर्द, वह जलता हुआ जिगर और सीना, वो मैं खुद हूँ। यह समर्पण का एक बहुत ही गहरा इज़हार है, जहाँ आशिक़ अपने दर्द को महबूब का हिस्सा बना देता है।

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