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सुनते ही हंस के टक इक सोचियो क्या तू ही था
जिन ने शब रो के सब अहवाल कहा मैं ही हूँ

Upon hearing, the swan thought, 'Was it you who spoke all these tales of yesterday? I am myself.'

मीर तक़ी मीर
अर्थ

सुनकर हंस ने सोचा, 'क्या तू ही था जिसने कल के सारे हाल कहे? मैं तो स्वयं हूँ।'

विस्तार

यह शेर आत्म-जागरूकता और कड़वे सच को बयां करता है। शायर कह रहे हैं कि जब उन्हें यह बात सुनाई दी, तो उन्हें लगा, 'क्या यह तू था?'... यानी जिस इंसान ने हमेशा रोने और दुख-दर्द की बातें की थीं, वे खुद ही वो दर्द हैं। यह बहुत गहरा अहसास है कि हमारे दुख का कारण बाहर नहीं, बल्कि कहीं भीतर है।

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